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Aurat ki Namaz ka tarika - औरत की नमाज़

 

नमाज़ इस्लाम का दूसरा अहम(pillers of islam) रुक्न  है।

“हर बालिग मर्द हो या औरत दिन रात में पांच नमाजों का अपने वक़्त पर  पढ़ना फ़र्ज़ है”

मुस्लिम औरतों की नमाज़ मर्दों कि नमाज़ से मुतलीफ है, इंशाअल्लाह इसको नीचे जानेंगे।

इस्लाम में नमाज़ पढ़ने के कुछ शर्ते हैं – जिसके बिना नमाज़ नहीं होगी

 

बाहिरी एतेबार से कुल 7  शर्तें हैं –

 

(1) बदन का पाक होना – नमाज़ पढ़ने के लिए बदन का पाक  होना यानी (हैज व निफास वगैरह) से पाक होना जरूरी है,नापाक हो तो गुस्ल करना चाहिए,नापाकी  के हालत में रहना गुनाह है।

(2) कपड़े का पाक होना –  नापाक कपड़े पहन कर नमाज़ पढ़ने से नमाज़ नहीं होगी, जिन खवातीन के छोटे बच्चे होते हैं उनको पाकी का खास खयाल रखना चाहिए।क्युकि अक्सर ख़वातीन अपने छोटे बच्चों  की वजह से नमाज़ें ज़ाया कर देतीं हैं

(3) जगह का पाक होना – जहां नमाज़ पढ़ी जाए वहां की जगह पाक होनी जरूरी है।गीली जगह या कोई गंदगी लगी हो वहां पढ़ना सही नहीं।

(4 ) वक़्त का होना किसी भी नमाज़ को अपने मुकर्रर वक़्त पर ही पढ़ना चाहिए ,किसी और वक़्त की नमाज़ कज़ा करके

दुसरे वक़्त पढ़ना  या नमाज़ में देरी करना गुनाह है

 

(5) क़िब्ला का मालूम होना – क़िब्ले का  रुख जानना ज़रूरी है,क्युकि हम जानते हैं की क़िब्ले की तरफ ही हमें नमाज़ पढ़ने का हुक्म है 

 

(6) नमाज़ की नीयत करना –  नमाज़ पढ़ने की नीयत करना के कौन सी नमाज़ पढ़ रहे हैं (मसलन फज्र, जुहर वगैरह)

 

(7) सतर  का छुपाना – औरतों के नमाज़ में सतर का छुपाना बहुत ज़रूरी है बिगैर इसके नमाज़ नहीं होगी।
कपड़ा या दुपट्टा इतना बारीक ना हो के बदन का हिस्सा या सर  के बाल दिखाई दे,इससे नमाज़ नहीं होगी।

सतर  में पूरे बदन को कपड़े या चादर या मोटा दुपट्टे से छुपाना चाहिए,सिर्फ चेहरे का और हाथों की कलाई और टखने के नीचे तक पाव खुले रखने की इजाजत है।

लेकिन ध्यान रखें की नमाज़ के दौरान चेहरे के अलावा पाव और हाथ कपड़े या दुपट्टे से छुपे हों।

 

नमाज़ के अंदुरुनी  6 शर्तें हैं –

 

(1) तकबीरे तहरीमा कहना – (तकबीरे ताहरीमा यानी अल्लाह हू अकबर कहना)

(2) कयाम करना –    (सीधे खड़े रहना)

(3) किरात करना –   (क़ुरान करीम की तिलावत करना )
(4) रुकुह  करना –  (झुकना )
(5)सजदा करना –   (दो सजदा करना)
(6) तशद्दुद  के हालत में बैठना – (दोनों पैरों पे बैठना )

 

तो ये कुल 13 फराइज़ हैं जिन में एक भी ना करें तो नमाज़ नहीं होगी।

 

पांच नमाज़ें और रिकात –

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फज़र (FAZR)
(कुल 4 रिकात )
जुहर (JOHAR)
(कुल 12 रिकात )
अस्र  (ASR)
(कुल 8  रिकात )
मगरिब (MAGRIB)
(कुल 7  रिकात )
ईशा (ISHA)
(कुल 17  रिकात )
सुन्नत(मो०) - 2 रिकात  फ़र्ज़ - 4 रिकातसुन्नत -  4 रिकात सुन्नत (मो ० ) 2 रिकातफ़र्ज़ - 4 रिकात 
फ़र्ज़ - 2 रिकात सुन्नत(मो०) 4 रिकातफ़र्ज़ - 4 रिकात फ़र्ज़ - 3 रिकात सुन्नत - 4 रिकात 
सुन्नत (मो ० ) 2 रिकात नफ़्ल - 2 रिकातसुन्नत (मो ० ) 2 रिकात
नफ़्ल - 2 रिकातनफ़्ल - 2 रिकात
वित्र - 3 या 1 रिकात 
नफ़्ल - 2 रिकात 

 

NOTE – (मो ० – सुन्नते मुकेदा जिसको पढ़ना ज़रूरी है)

 

नमाज़ का तरीका –

औरतों के नमाज़ के तरीके के बारे में बाज़ उलमा मर्दो जैसी नमाज़ पढ़ना बताते है और बाज़ उलमा की इसमें इख्तेलाफ़ात है,

बेहरहाल मै आपके सामने ज्यादा तर उलमा की राय वाली नमाज़ का तरीक़ा पेश करता हु 

सबसे पहले  काबा के तरफ मुँह करके और जिस वक़्त की नमाज़ है और जितनी रिकात है उसकी नियत कर लें,

दोनों हाथों तो दुपट्टे से बाहर निकाले बेगैर  काँधे तक उठा कर तकबीर कहे (अल्लाह हु अकबर)  और दोनों हाथों को सीने के ऊपर बांध लें , दाहिने हाथ की हथेली को बाएं हाथ की हथेली की पुश्त पर रख लें,निगाह सजदे की तरफ हो 

 

और सना पढ़े –

 

तर्जुमा – ऐ अल्लाह तेरी ज़ात पाक है खूबियों वाली और तेरा नाम बरकत वाला है और तेरा नाम ऊँचा है और तेरे सिवा कोई मअबूद  नहीं 

 

इसके बाद ये पढ़े –

 

 

इसके बाद –

بِسْمِ ٱللَّٰهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

शुरू अल्लाह  जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है 

 

क़याम –

क़ुरआन करीम की पहली सूरह फ़तिहा  यानी  (ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ ) पढ़े और अमीन कहें,और इसके बाद क़ुरान करीम कोई  सूरत पढ़े छोटी  हो या बड़ी लेकिन कम से कम 3 आयतें ज़रूर पढ़ें 

 

रुकुह –

अल्लाह हु अकबर कहकर रुकुह में जाएं यानि झुके,हाथों की उँगलियों को मिला कर दोनों घुटने (knee ) पर  रखें और दोनों पैर को मिलाकर निगाह दोनों पैरों की उँगलियों पर हो फिर ये अलफ़ाज़ 3  बार कहें 

 

तर्जुमाः पाकी बयान करती हु  मैं अज़ीम रब की 

 

फिर सीधा खड़े हों और कहे –

तर्जुमाः सुन ली अल्लाह उसकी बात जिसने उसकी तारीफ की 

 

उसके बाद रब्बना लकल हम्द पढ़े 

तर्जुमाः या रब सब तारीफें तेरे लिए है 

 

सजदा –

रब्बना लकल हम्द कहने  के बाद अल्लाह हु अकबर कहते हुए सजदे में जाएं

और 3  बार ये पढ़े –

                                                           सुबहाना रब्बियल आला 

तर्जुमाः पाकी  बयान करती हु अपने आला और ऊचे रब की 

 

सजदे में जाते वक़्त पहले घुटने को, फिर दोनों हाथ को ज़मीन पे रखना चाहिए और उंगलियां आपस में मिली  होनी चाहिए,सजदे में पहले नाक फिर पेशानी को  ज़मीन पे रखें,दोनों पैरों को दाहिनी तरफ रखे और खूब सिमटा  कर रखें और सजदे में निगाह नाक पर होनी चाहिए 

फिर अल्लाह हु अकबर कहते हुए पहले पेशानी फिर नाक को उठाएं ,इसी तरह दूसरा सजदा भी पूरा करें और अल्लाह हु अकबर कहते हुए खड़े हो जाये,हाथ के सहारे से खड़े न हो हाँ अगर कोई उज़्र या खड़े होने में परेशानी हो तो अलग बात है 

पहली रकात  के होने पर दूसरी रिकात इसी तरह पूरा करें (लेकिन दूसरी रकअत में सना नहीं पढ़ना चाहिए)

 

तशद्दुद  के हालत में बैठना – 

दूसरी रकात के दो सजदों के बाद अल्लाह हु अकबर कह कर जो दोनों पैरों पर बैठते हैं उसे तशादुद कहते हैं,

तशद्दुद यानि बैठे हुए निगाह गोद पर होना चाहिए

और ये पढ़े –

तर्जुमा – तमाम इबादतें अल्लाह के लिए है और तमाम नमाजें और अच्छी बातें (भी अल्लाह के लिए है) ,
आप पर सलाम हो एह अल्लाह के नबी (सलअल्लाहू अलैही वसल्लम) और अल्लाह की रहमतें और उसकी बरकतें नज़िल हों,
हम पर (भी) सलाम हो और अल्लाह के सभी नेक बन्दों पर (भी सलाम),
मैं गवाही देती  हूँ की अल्लाह के सिवा कोई माबूद नही,
और गवाही देती  हूँ की मुहम्मद (सलअल्लाहू अलैही वसल्लम) उसके बंदे और रसूल हैं.

Note – अशहदु अल लाइलाहा पढ़ते वक़्त अपनी शहादत की उंगली को हल्का सा ऊपर उठाये

           फिर वाशहददु अन्ना पढ़ कर वापस निचे कर लें

(अगर 4 रकात नमाज़ पढ़ रहे हों, तो तशद्दुद में शहादत उंगली निचे करने के बाद अल्लाह हु अकबर कहते हुए तीसरी रिकात के लिए खड़े हों और तीसरी और चौथी रकात पूरी करें )

 

उसके बाद दरूदे इब्राहिम पढ़े –

ٱللَّٰهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ ٱللَّٰهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ

तर्जुमा – ऐ अल्लाह रहमत नाज़िल  कर हज़रत मुहम्मद (सल्लललाहु अलैहि वसल्लम)  पर और  हज़रत मुहम्मद (सल्लललाहु अलैहि वसल्लम) के औलाद पर  जिस तरह रहमत नाज़िल की तूने हज़रत इब्राहिम पर और हज़रत इब्राहिम के औलाद पर , बेशक तू तारीफ के लायक,बड़ी बुज़ुर्गी वाला है 

ऐ अल्लाह बरक़त   नाज़िल  कर हज़रत मुहम्मद (सल्लललाहु अलैहि वसल्लम)  पर और  हज़रत मुहम्मद (सल्लललाहु अलैहि वसल्लम) के औलाद पर  जिस तरह बरक़त  नाज़िल की तूने हज़रत इब्राहिम पर और हज़रत इब्राहिम के औलाद पर , बेशक तू तारीफ के लायक,बड़ी बुज़ुर्गी वाला है 

 

दरूद इब्ररहीम पढ़ने  के बाद कोई दुआ पढ़े जैसे (रब्बना अतिना)वाली याद हो तो पढ़ ले 

दुआ पढ़ने के बाद पहले दाहिने तरफ फिर बायीं तरफ मुँह फेर कर सलाम कहें

 

तर्जुमाः आप पर सलामती हो और अल्लाह की रहमत हो 

 

Note –

वीतर(witr) नमाज़ का तरीक़ा फ़र्ज़ और सुन्नतों व नवाफिल से अलग है,वीतर नमाज़ में तीसरी रकअत में

सुरह फातिहा और एक कोई भी सुरह  पढ़ने के बाद अल्लाह हु अकबर कहकर हाथ कन्धे तक  उठा कर

फिर हाथ सीने के ऊपर बांध ले और दुआ ए क़ुनूत पढ़े 

 

सजदा सहु –

अगर  नमाज़ के दौरान कोई गलती हो जाये तो सजदा ए सहु करना चाहिए,इसका तरीक़ा  ये है के तशद्दुद में बैठे हुए अत्तहिय्यत और दरूद ए इब्राहिम और दुआ के बाद सिर्फ  दाहिने तरफ सलाम करें और दो सजदा करें फिर नमाज़ पूरी करें 

 

दीन की सही मालूमात  कुरआन और हदीस के पढने व सीखने से हासिल होगी |(इंशाअल्लाह)

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दुआ की गुज़ारिश 

 

 

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بِسمِ اللہِ الرَّحمٰنِ الرَّحِيم ” शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है बहुत मेहरबान है ”   खजूर (Dates) – अल्लाह तआला ने हमें बेशुमार नेमतें से नवाज़ा है, उन नेमतों में से खजूर एक अहम्  नेमत है जिसका ज़िक्र हदीसों में कसरत से आया है | नबी करीम (स०अ०) के ज़माने में कसरत से खजूर के बागात हुआ करतीं थीं | ये नबी करीम (स०अ०) की दुआओ का सिला है के उस ज़माने से आज भी अरब में कसरत से पुरे साल खजूरों की खेती होती है और कभी कमी ना आई |   इसके मुताल्लिक हदीस – हज़रत साद बिन अबी वक्कास (रज़ी०) से मय्सर है के वह अपने वालिद गरामी से रिवायत करते हैं के नबी (स०अ०) ने फ़रमाया – जिस शख्स ने निहार मुह अज्वा खजूर के सात दाने खाए उसको उस दिन में ना तो किसी ज़हर से और ना किसी जादू से नुक्सान पहुंचेगा | (मुस्लिम ,अबू दाऊद) उपर के हदीस में मसनदे अहमद ने इजाफा किया है के – और अगर उसने ये खजूरें शाम को खाई तो किसी चीज़ से सुबह तक कोई नुक्सान नहीं होगा |   खजूर के फायदे – (1) खजूर में ज्यादा मिकदार में पोटाशियम होता है जो के बदन की कमज़ोरी में बहुत फायदेमंद है | रोज़ाना एक खजूर का दूध के साथ खाना बदन की कमज़ोरी को

Aulad ki tarbiyat – औलाद की तरबियत कैसे करें

بِسمِ اللہِ الرَّحمٰنِ الرَّحِيم ” शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है बहुत मेहरबान है ”     औलाद की तरबियत – औलाद की तरबियत करना माँ-बाप की अहम् ज़ोम्मेदारी है | ये बात भी काबिले एतेबार है के अगर घर की ख़वातीन या माँ दीनदार है तो इंशाअल्लाह बच्चे ज़रूर दीनदार होंगे क्यूंकि बच्चों की असल दर्सगाह माँ की गौद है | जैसा उसके घर का माहौल होगा तो बच्चे ज़रूर उसमे ढालेंगे अगर माँ-बाप ही नए माहौल के हों तो बच्चे का दीनदार होना मुश्किल है |   अल्लाह तआला का इरशाद – يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ قُوٓا۟ أَنفُسَكُمْ وَأَهْلِيكُمْ نَارًۭا وَقُودُهَا ٱلنَّاسُ وَٱلْحِجَارَةُ عَلَيْهَا مَلَـٰٓئِكَةٌ غِلَاظٌۭ شِدَادٌۭ لَّا يَعْصُونَ ٱللَّهَ مَآ أَمَرَهُمْ وَيَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ तर्जुमा – ए ईमान वालों ! अपने आप को और अपने घर वालों को उस आग से बचाओ जिसका इंधन इंसान और पत्थर होंगे उसपर शख्त कड़े मिजाज़ के फरिश्तें मुक़र्रर हैं जो अल्लाह के किसी हुक्म में उसकी नाफ़रमानी नहीं करते, और वही करते हैं जिसका उन्हें हुक्म दिया जाता है | (सुरह तहरिम आयत 6) इसके मुताल्लिक हदीस – नबी करीम (स०अ०) ने इरश