Duniya ki Asal Haqeeqat - दुनिया की हकीक़त क्या है –

 

بِسمِ اللہِ الرَّحمٰنِ الرَّحِيم

शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है बहुत मेहरबान है

 

दुनिया की असल हकीक़त –

दुनिया के बारे में मशहूर कौल है के ” दुनिया मोमिनों के लिए क़ैद खाना है “

यानी दुनिया मुसलमानों के लिए एक जेल की तरह है, अपने पास अखतियार होने के बावजूद अपनी मर्ज़ी से कोई अमल नहीं करना  बलके अल्लाह तआला का हुक्म और हुजुर अकरम (स०अ०) की सुन्नत पर मरते दम तक ज़िन्दगी गुज़ारनी है और इसी को तक्वा कहते है  और यही असल कामयाबी है |

 

कुरआन मजीद में अल्लाह तआला का इरशाद –

وَمَا ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَآ إِلَّا مَتَٰعُ ٱلْغُرُورِ

” और ये दुनयावी ज़िन्दगी (जन्नत के मुकाबले में ) धोखा के सामान के सिवा कुछ भी नहीं “

 

इसके मुताल्लिक हदीस –

हज़रत अबू सईद ख़ुदरी (रज़ी०) रिवायत करते हैं कि रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया –

बेशक दुनिया मीठी और सरसब्ज़ है | यानी एक इंसान को दुनिया की शान व शौकत, दुनिया की लाज्ज़तें, दुनिया की खवाइशें बड़ी खुशनुमा मालूम होती है | गोया कि यह दुनिया खुशनुमा भी है और बजाहिर मजेदार भी है | लेकिन अल्लाह तआला ने इसको तुम्हारी आज़माइश का एक ज़रिया बनाया है और तुमको इस दुनिया में अपना ख़लीफा बनाकर भेजा है ताकि वह यह देखे कि तुम इस दुनिया में कैसा अमल करते हो |

इस दुनिया अपना कोई नहीं –

हुज़ूर पाक (स०अ०) का इरशाद है – जब वक़्त आयगा और लोग क़ब्र के गड्ढे में रख कर चले जायेंगे, उस वक़्त तो यह सच्चाई खुल जाएगी की इस दुनिया में अपना कोई नहीं | ना यार-दोस्त और ना रिश्तेदार अपने हैं और ना ही माल व दौलत अपना है लेकिन उस वक़्त पता चलने से कोई फायदा नहीं होगा | चुनांचे लोग अपना बुरा अंजाम देखकर अल्लाह तआला से अर्ज़ करेंगे के एक बार हमें दुनिया में भेज दें, के नेकी करके जन्नत हासिल कर लें लेकिन हरगिज़ ये ना होगा |

 

दुनिया की हैसियत पानी का क़तरा –

मुस्लिम शरीफ़ की एक हदीस में है के हज़रत मुस्तौरिद बिन शद्दाद (रज़ी०) रिवायत करते हैं के हुजुर (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया कि – आखिरत के मुकाबले में दुनिया की मिसाल एसी है जैसे कि तुम में से कोई शख्स अपनी उंगली समंदर में डाले और फिर वह उंगली निकाल ले | यानी उस उंगली पर जितना पानी लगा हुआ होगा, आखिरत के मुकाबले में दुनिया की इतनी भी हैसियत नहीं |

बड़ी अजीब बात है के इंसान सुबह शाम उंगली पर लगे पानी जितनी ज़िन्दगी के फ़िक्र में लगा रहता है और समंदर जैसी ज़िन्दगी जो आगे पेश आने वाली है उससे गाफिल है |

 

दुनिया में कैसे रहें  –

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ी०) रिवायत करते हैं कि एक दिन हुजुर (स०अ०) ने मेरे कंधे पर हाथ रखा | कंधे पर हाथ रखना बड़ी शफ़क़त, बड़ी मुहब्बत, बड़े प्यार का अंदाज़ है | और इसके बाद फ़रमाया – दुनिया में इस तरह रहो जैसे अजनबी हो या रास्ते के राही और मुसाफिर हो |(बुख़ारी )

यानी जैसे मुसाफिर सफ़र के दौरान कहीं किसी मंजिल पर ठहरा हुआ होता है तो वह यह नहीं करता कि उस मंजिल ही की फ़िक्र में लग जाए और जिस मकसद के लिए सफ़र किया था, वह मकसद भूल जाये |

 

दिल में दुनिया होने की एक निशानी –

दिल में दुनिया होने की निशानी और पहचान यह है कि – सुबह से लेकर शाम तक ये फ़िक्र रहती है कि ज्यादा पैसे कहाँ से कमा लूँ या माल किस तरह जमा कर लूँ वगैरह

अगर मरने का ख़याल और आखिरत का ख्याल आता है तो फिर अल्हुम्दुलिललाह ! दुनिया की मुहब्बत दिल में नहीं है | और अगर दुनिया की फ़िक्र और सोच हर वक़्त रहती हो तो दुनिया की मुहब्बत उसके दिल में बैठी है |

 

दुनिया की मुहब्बत दिल से कैसे निकालें –

दुनिया को अपने दिल से निकलने का और आखिरत की फक्र दिल में पैदा करने का तरीका ये है कि – दिन – रात में वक़्त निकाल के इस बात का ध्यान और गौर करें की एक दिन मरना है, किस तरह अल्लाह तआला के सामने मेरी पेशी होगी ? क्या सवाल होंगे और क्या जवाब देना होगा ?

अगर कोई शख्स रोजाना इन बातों का गौर व फ़िक्र किया करे तो इंशाअल्लाह कुछ ही हफ़्तों में वह महसूस करेगा की उसके दिन से दुनिया की मुहब्बत नक़ल रही है |

 

दीन की सही मालूमात  कुरआन और हदीस के पढने व सीखने से हासिल होगी |(इंशाअल्लाह)

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दुआ की गुज़ारिश

 

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