Hajat aur Pareshani ki dua – परेशानी के वक़्त की दुआ

 

بِسمِ اللہِ الرَّحمٰنِ الرَّحِيم

शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है बहुत मेहरबान है

 

 

हाजत और परेशानी के वक़्त दुआ –

ज़िन्दगी के हर मसले का हल अल्लाह ने कुरआन मजीद में रखी है | कोई भी हाजत और परेशानी का हल कुरआन व हदीस से करना मोमिनों की अव्वल ज़िम्मेदारी है | हुज़ूर (स०अ०) ने एसी कितनी ही दुआ बतलाया है जिनको पढ़कर अपनी हाजत और परेशानियों पूरा कर सकते हैं |

 

चंद दुआ ए हाजत व परेशानी –
(1) आयत ए करीमा –

لاَّ إِلَـهَ إِلاَّ أَنتَ سُبْحَـنَكَ إِنِّى كُنتُ مِنَ الظَّـلِمِينَ

ए अल्लाह ! तेरे सिवा कोई माअबुद नहीं | तेरी ज़ात पाक है बेशक मैं कुसूरवार हूँ |

फ़ज़ीलत –

ये दुआ हज़रत युनुस (अ०स०) ने मछली के पेट की तरिखियों में की थी जो अल्लाह तआला ने  क़ुबूल फ़रमाया और अंधेरियों से निज़ात अता फ़रमाया |

नबी करीम (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – जिस मुसलमान ने भी किसी मुसीबत में इस दुआ से अल्लाह को पुकारा, अल्लाह तआला उसकी दुआ ज़ुरूर क़ुबूल फरमाएंगे |

अक्सर उलमा की राय है के हर मुसीबत और परेशानी आये तो ये दुआ को कसरत से पढनी चाहिए | बाज़ उलमा के मुताबिक एक लाख चौबीस हज़ार दफाह ये दुआ पढने से हाजत इंशाअल्लाह ज़रूर पूरी होगी |

 

(2) जब परेशानी आ जाये –

الَّذِينَ إِذَا أَصَابَتْهُم مُّصِيبَةٌ قَالُواْ إِنَّا لِلّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعونَ

जिन्हें, जब कभी कोई मुसीबत आती है तो कह दिया करते हैं के हम तो खुद अल्लाह तआला की मिलकियत हैं और हम उसी की तरफ़ लौटने वाले हैं |

फ़ज़ीलत

जब कभी कोई मुसीबत आ जाये या कोई शख्त परेशानी हो तो ये दुआ पढ़े |

 

(3) मुश्किलात में नबी करीम (स०अ०) का अमल –

            يَا حَيُّ يَا قَيُّوْمُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيْث

                                                            ए जिंदा ! ए क़ायम व दायम ! मैं तेरी रहमत के साथ मदद का तलबगार हूँ |

 

फ़ज़ीलत –

हज़रत अनस (रज़ी०) कहते हैं रसूल अल्लाह (स०अ०) परेशानी के वक़्त ये दुआ पढ़ा करते थें | रोज़ाना सुबह और शाम ये दुआ पढ़ने की आदत डालनी चाहिए, इंशाअल्लाह मुसीबत और परेशानी दूर होगी |

 

(4) मुश्किल के वक़्त हज़रत मूसा (अ०स०) का अमल –

 رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ

ए परवरदिगार ! तू जो कुछ भलाई मेरे तरफ़ उतारे मैं इसका मोहताज हूँ |

फ़ज़ीलत –

कुरआन करीम के (सुरह क़सस आयत 24) में है के ये दुआ हज़रत मूसा (अ०स०) ने उस वक़्त मांगी थी जब वह फिरौन के ज़ुल्म से निजात पाने के लिए मिस्र से निकलकर मदयन पहुंचे थे, वहां उनका कोई पुसाने हाल न था | अल्लाह तआला ने इस दुआ की बरकत से उनकी मुलाक़ात हज़रत शोहैब (अ०स०) से कर दी थी और उनकी खुशगवार जिन्दी का आगाज़ हुआ |

 

(5) दुनिया व आखिरत के तमाम गम से निज़ात –

حَسْبِيَ اللَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَهُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ

मेरे लिए अल्लाह काफ़ी है | उसके सिवा कोई माबूद नहीं | मैंने उसपर भरोसा किया और वह बड़े अर्श का मालिक है |

फ़ज़ीलत –

हज़रत अबू दर्दा (रज़ी०) से रिवायत है के रसूल करीम (स०अ०) ने फ़रमाया – जो आदमी इस दुआ को सुबह व शाम 7 मर्तबा पढ़ेगा उसे अल्लाह तआला दुनिया व आखिरत के तमाम गमो से काफी हो जायेगा |

दीन की सही मालूमात  कुरआन और हदीस के पढने व सीखने से हासिल होगी |(इंशाअल्लाह)

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दुआ की गुज़ारिश

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