Hazrat Abu Hurairah (R.A) ki Riwayat Hadeesein

 

हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) के बारे में –

हज़रत अबू हुरौरह (रज़ी०) एक मशहूर सहाबिये रसूल थे |

जिन्होंने तक़रीबन 5300 से ज्यादा हदीसें हुजुर अकरम (स०अ०) से नक़ल की थीं|ज़माने जाहिलियत में आप (रज़ी०) का अबुदुस समस था |इम्मान लाने के नबी करीम (स०अ०) ने आप (रज़ी०) का नाम अब्दुर -रहमान रख दिया,आप यमन के रहने वाले थे और आप की कुन्नियत हुरैरह है|

हज़रत अबू हुरौरह (रज़ी०) को यादाश्त कमज़ोर थी तो आप (रज़ी०) ने नबी करीम (स०अ०) से इसकी शिकायत की,नबी करीम (स०अ०) ने हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) को अपनी चादर फ़ैलाने को कहा,आप (रज़ी०) ने हुक्म की तामीर की फिर नबी करीम (स०अ०) ने फ़रमाया इससे अपने सीने से लगाओ,फिर अबू हुरैरह (रज़ी०) ने अपने सीने से लगाए,फिर वह कभी भी कोई बात नही भूले | 

 

आप (रज़ी०) की रिवायत हदीसें – 

 कालिमा तय्यब  के मुताल्लिक हदीसें –

 

1 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – ईमान की 70 से ज्यादा शाखें है |उनमें सबसे अफज़ल शाख़ (ला इला – ह – इल्लललाह ) का कहना है और अदना शाख तकलीफ देने वाली चीजों का रास्ते से हटाना है और हया ईमान का एक अहम् शाख़ है  

 

2  हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अपने ईमान को ताज़ा करते रहा करो |अर्ज़ किया गया – ए अल्लाह के रसूल (स०अ०) ! हम अपने ईमान को किस तरह ताज़ा करें ? इरशाद फ़रमाया –  (ला इला – ह – इल्लललाह ) को कसरत से कहते रहा करो 

 

3  हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – जिसने (ला इला – ह – इल्लललाह ) कहा,उसको यह कालिमा एक न एक दिन ज़रूर फायदा देगा,नजात दिलाएगा, अगरचे उसको कुछ न कुछ सज़ा पहले भुगतना पड़े |

 

4  हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अल्लाह तआला ने मेरी उम्मत के उन वस्वसों को माफ़ फरमा दिया है,जो ईमान और यकीन के खिलाफ या गुनाह के बारे में उनके दिल में बगैर अख्तियार के आयें | जब तक के उन वस्वसों के मुताबिक अमल न कर लें या उनको जुबान पर न लाये |

 

5  हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) नबी करीम (स०अ०) का इरशाद नक़ल फरमाते हैं  कि  (ला इला – ह – इल्लललाह) की गवाही कसरत से देते रहा करो,इससे पहले कि एसा वक़्त आए कि तुम इस कालिमा को मौत या बीमारी वगैरह की वजह से न कह सको |

 

6 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है कि नबी करीम (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – ईमान ये है कि तुम अल्लाह तआला को,उसके फ़रिश्ते को और (आखिरत में ) अल्लाह तआला से मिलने को और उसके रसूलों को हक़ जानो और हक़ मनो और मरने के बाद दोबारा उठाए जाने को हक़ जानो,हक़ मानो |

 

7 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) नबी करीम (स०अ०) से रिवायत करते हैं कि आप (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अल्लाह तआला क़यामत के दिन ज़मीन को अपने कब्ज़े में लेंगे और असमान को अपने दाहिने हाथ में लपेटेंगे,फिर फरमाएंगे कि में ही बादशाह हूँ,कहाँ हैं ज़मीन के बादशाह |

 

8 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) फरमाते हैं कि नबी करीम (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – तुम किसी गुनाहगार को नेमतों में देखकर उस पर रश्क न करो,तुम्हे मालूम नही मौत के बाद उसके साथ क्या होने वाला है ? अल्लाह तआला के यहां उसके लिए एक एसा क़ातिल है,जिसको कबी मौत नही आयेगी (क़ातिल से मुराद दोज़ख की आग है,जिसमे वो रहेगा )

 

9 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है कि नबी करीम (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – इस्लाम यह है कि तुम अल्लाह तआला की इबादत करो और उनके साथ किसी को शरीक न ठहराओ,नमाज़ कायम करो,ज़कात अदा करो,रमजान के रोज़े रखो,हज करो,नेकी का हुक्म करो,बुराई से रोको  और अपने घर वालों को सलाम करो |जिस शख्स ने उनमे से किसी चीज़ में कुछ कमी की तो वह इस्लाम के एक हिस्से को छोड़ रहा अहि और जिसने उन सब को बिलकुल छोड़ दिया,उसने इस्लाम से मुह फेर लिया |

 

10 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) फरमाते हैं कि रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – दुनिया मोमिन के लिए क़ैदखाना है और काफ़िर के लिए जन्नत है |

 

 

नमाज़ के मुताल्लिक हदीसें –

 

1 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – पांच नमाजें,जुमा की नमाज़ पछले जुमा तक और रमज़ान के रोज़े पछले रमज़ान तक दरमियानी औकात के तमाम गुनाहों के लिए कफ्फारा हैं,जबकि उन आमाल को करने वाले कबीरा गुनाहों से बचे |

 

2 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अगर लोगों को अज़ान और पहली साफ का सवाब मालूम हो जाता और उन्हें अज़ान और पहली सफ कुरआअंदाजी के बगैर हासिल न होती,तो वह कुरआअंदाजी करते |

 

3 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है कि नबी करीम (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – जब तुममे से कोई शख्स अपने घर से मेरी मस्जिद के लिए निकलता है,तो उसके घर वापस होने तक हर क़दम पर एक नेकी लिखी जाती है और हर दुसरे क़दम पर एक बुराई मिटाई जाती है |

 

4 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया -क़यामत के दिन अल्लाह तआला उन लोगों को जो अंधेरों में मस्जिदों की तरफ जाते हैं (चारों तरफ्) फैलने वाले नूर से मुनव्वर फरमाएंगे |

 

5 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – जो रमजान की रात में अल्लाह तआला के वादों पर यकीन करते हुए और उसके अज्र व इनाम के शौक में नमाज़ पढता है,उसके पछले सब गुनाह माफ़ हो जातें हैं |

 

6 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – रमज़ानुल मुबारक के बाद सबसे अफज़ल रोज़े माहे मुहर्रम का है और फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद सबसे अफ्जल नमाज़ रात की है |

 

7 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – जो चाशत की दो रकात पढने का अह्तामाम करता है उसके गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं,अगरचे वे समंदर के झाग के बराबर हों|

 

8 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अल्लाह तआला एसे आदमी की नमाज़ की तरफ देखते ही नही जो रुकुह और सजदा के दरमियान यानि कौमा में अपनी कमर को सीधी न करे |

 

9 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की नबी करीम  (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अगर मुझे यह ख्याल न होता कि मेरी उम्मत मुशक्कत में पड़ जाएगी,तो मै उनको नमाज़ के वक़्त मिस्वाक करने का हुक्म देता |

 

10 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अल्लाह तआला को सब जगहों से ज्यादा महबूब मस्जिद हैं और सबसे ज्यादा नापसंद जगहें बाज़ार हैं|

 

इल्म के मुताल्लिक हदीसें – 

 

1 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अल्लाह तआला उस शख्स से नफरत करते हैं जो शख्तमिजाज हो,ज्यादा खाने वाला हो,बाजारों में चीखने वाला हो,रात में मुर्दे की तरह (पड़ा सोता रहता )हो,दिन में गधे की तरह (दुनयावी कामों में फसा रहता )हो,दुनिया के मामलों का जानने वाला और आखिरत के उमूर से बिलकुल जाहिल हो |

 

2 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) फरमाते  हैं  की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – जिस शख्स से इल्म की कोई बात पूछी जाए और वह (बावजूद  जानने के ) उसको छुपाए तो अल्लाह तआला क़यामत के दिन उसके मुह में आग की लगाम डालेंगे |

 

3 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत करते  है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अल्लाह तआला इतना किसी की तरफ तवज्जो नही फरमाते जितना की उस नबी की आवाज़ को तवज्जो से सुनते हैं जो कुरान करीम ख़ुशइल्हानी से पढता है |

 

4 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – जब तुममें से कोई (सुरह – फ़ातिहा के आखिर में ) अमीन कहता है,तो उसी वक़्त फ़रिश्ते आसमान पर आमीन कहते हैं,अगर उस शख्स की आमीन फरिश्तों की आमीन के साथ मिल जाती है तो उसके पछले तमाम गुनाह माफ़ हो जातें हैं |

 

5 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – सुरह -बकरह में एक आयत है जो कुरान शरीफ की तमाम आयातों की सरदार है | वह आयत जैसे ही किसी घर में पढ़ी जाए और वहां शैतान हो तो फौरन निकल जाता है,वह आयतुल कुर्सी है 

 

6 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – हर चीज़ की कोई चोटी होती है (जो सबसे उपर और बालातर होती है ) और कुरान करीम की चोटी सुरह बकरह है और उसमें एक आयत एसी है जो कुरआन शरिफ् की सारी आयतों की सरदार है,वह आयतुल कुर्सी है |

 

7 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – जो शख्स रात में दस आयतों की तिलावत करे,वो उस रात अल्लाह तआला की इबादत से गाफिल रहने वालों में शुमार नही होगा |

 

8 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०)  रिवायत  करते हैं  की नबी करीम  (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अल्लाह तआला का इरशाद है -जब मेरा बंदा मुझे याद करता है और उसके होंठ मेरी याद में हिलते रहते हैं,तो मै उसके साथ होता हूँ|

 

9 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की नबी करीम  (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – बंदा जब तक गुनाह और रिश्तों के काटने की दुआ न करे उसकी दुआ कुबूल होती रहती है,बशर्ते कि वह जल्दबाजी न करे |पूछा गया या रसूल अल्लाह जल्दबाज़ी का क्या मतलब है ? इरशाद फ़रमाया – बंदा कहता है मैंने दुआ की,फिर दुआ की,लेकिन मुझे तो कुबूल होती नज़र नही आती,फिर उकता कर दुआ करना छोड़ देता है |

 

10 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की नबी करीम  (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – तीन दुआएं खास तौर पर कुबूल की जातीं हैं,जिनके कुबूल होने में कोई शक नही |(औलाद के हक़ में ) बाप की दुआ,मुसाफिर की दुआ और मज़लूम की दुआ |

 

 

हुस्ने अखलाक के मुताल्लिक हदीसें –

 

1 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – ईमान वालों में कामिलतरीन मोमिन वह है जिसके अखलाक सबसे अच्छे हों और तुम में से वो लोग सबसे बेहतर हैं जो अपनी बीवी के साथ (बर्ताव में ) सबसे अच्छे हों |

 

2 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – हज़रत मूसा बिन इमरान (अ०स०) ने अल्लाह तआला की बारगाह में अर्ज़ किया -ए मेरे रब ! आप के बन्दों में आपके नज़दीक ज्यादा इज्ज्ज़त वाला कौन है ?अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया – वह बंदा जो बदला le सकता हो और फिर माफ़ कर दे |

 

3 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – ताक़तवर वह नही है जो (अपने मुकाबिल को ) पछाड़ दे,बलके ताक़तवर वह है जो गुस्से की हालत में अपने आप पर काबू पा ले|

 

4 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – जो मुसलमान की लगजिश को माफ़ करे,अल्लाह तआला क़यामत के दिन उसकी लगजिश को माफ़ फरमाएंगे |

 

5 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की नबी करीम  (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – छोटा बड़े को सलाम करे,गुज़रने वाला बैठे हुए को सलाम करे और थोड़े आदमी ज्यादा आदमी को सलाम करे |

 

6 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – मोमिन वह है जिससे लोग अपनी जान और माल के बारे में अम्न में रहे |

 

7 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की नबी करीम  (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – एक दुसरे को हदिया दिया करो,हदिया दिलों की रंजिश को दूर करती है |कोई पड़ोसन अपनी पड़ोसन को हकीर न समझे,अगरचे वह बकरी के खुर का एक टुकड़ा ही क्यों न हो (इसी तरह देने वाली भी इस हदिया को कम न समझे )

 

8 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – वह शख्स जन्नत में दाख़िल न हो सकेगा जिसकी शरारतों से उसका पडोसी महफूज़ न हो |

 

9 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – मेरा जो उम्मती मदीना तैयबा के कयाम की मुश्किलात को बर्दाश्त करके यहाँ कियाम करेगा,मैं क़यामत के दिन उसका सिफारशी या गवाह बनूंगा |

 

10 हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) से रिवायत है की एक शख्स ने  रसूल अल्लाह (स०अ०) से अपनी शख्तदिली की शिकायत की |आप (स०अ०) ने इरशाद फारमाया – यतीम के सिर पर हाथ फेरा करो और मिसकीनों को खाना खिलाया करो |

 

दीन की सही मालूमात  कुरआन और हदीस के पढने व सीखने से हासिल होगी |(इंशाअल्लाह)

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दुआ की गुज़ारिश 

 

 

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