Huzur s.a.w ki biwiyan – नबी (स०अ०) की बीवियों का बयान

 

بِسمِ اللہِ الرَّحمٰنِ الرَّحِيم

शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है बहुत मेहरबान है

 

नबी करीम (स०अ०) की बीवियां –

नबी करीम (स०अ०) की बीवियों के बारे में जानना हमारे लिए ज़रूरी है के आप (स०अ०) का अपनी बीवियों के साथ कैसा मामला था |

मुहद्दीसीन और मुवर्रिखींन का इत्तिफाक़ है के आप (स०अ०) का निकाह ग्यारह औरतों से हुआ | इंशाअल्लाह बरी बरी उनका ज़िक्र निचे बयान होगा |

 

आप (स०अ०) की ग्यारह बीवियां –
(1) उम्मुल मुमिनीन हज़रत ख़दीजा (रज़ी०) –

नबी करीम (स०अ०) का सबसे पहला निकाह हज़रत ख़दीजा (रज़ी०) से हुआ, जो बेवा थीं | उस वक़्त हुजुर (स०अ०) की उम्र शरीफ़ 25 साल की थी और हज़रत ख़दीजा (रज़ी०) की उम्र 40 साल थी | बाज़ कौल के मुताबिक हज़रत ख़दीजा (रज़ी०) का पहले दो शख्ससों से निकाह हुई थी और उनसे औलादें भी थीं |

हुजुर (स०अ०) को हज़रत ख़दीजा (रज़ी०) से बेहद मुहब्बत थी, उनकी ज़िन्दगी में कोई दूसरा निकाह नहीं किया | 25 साल तक आप (स०अ०) के निकाह में रहीं और 65 साल के उम्र में आप ने इंतकाल फ़रमाया | उनके इंतकाल पर हुजुर (स०अ०) बेहद ग़मज़दा हुए, आप (स०अ०) ने खुद कब्र में उतरकर उनको दफ़न फ़रमाया |

 

(2) उम्मुल मोमिनीन हज़रत आइशा (रज़ी०) –

हज़रत आईशा (रज़ी०) से निकाह शव्वाल में हुआ, उस वक़्त आप (रज़ी०) की उम्र 6 साल की थी | हुजुर (स०अ०) बीवियों में यहीं सिर्फ एक एसी हैं, जिनसे कुंवारेपन में निकाह हुआ बाकी सब से बेवा की हालत में हुआ | नबी करीम (स०अ०) के नबूवत मिलने के 4 साल बाद हज़रत आईशा (रज़ी०) पैदा हुईं | जब 9 साल की हुईं तो आप की रुखसती हुई | आप (स०अ०) की चाहिती बीवी थी और आप (स०अ०) को उनसे बहुत मुहब्बत थी |

हज़रत आईशा (रज़ी०) जब 18 साल की थीं, तब नबी करीम (स०अ०) ने इंतकाल फ़रमाया | 66 साल की उम्र में 17 रमज़ान, 57 हिजरी उनका विसाल हुआ | जन्नतुल बाकी में दफ़न की गयीं |

 

(3) उम्मुल मोमिनीन हज़रत सौदा (रज़ी०) –

हज़रत सौदा (रज़ी०) का भी निकाह शव्वाल के महीने में हुई थी, इसमें इखतलाफ है की हज़रत आईशा और हज़रत सौदा (रज़ी०) में से किनका निकाह पहले हुआ लेकिन बाज़ मुवार्रिखींन ने हज़रत आईशा (रज़ी०) और बाज़ ने हज़रत सौदा (रज़ी०) का पहले बताया है |

हज़रत सौदा (रज़ी०) भी बेवा थी | पहले से अपने चचाजाद भाई सकरान बिन अम्र के निकाह में थीं | जब पहले खाविंद का इंतकाल हुआ तो कुछ दिनों बाद उनका निकाह आप (स०अ०) से हुआ | नबी करीम (स०अ०) के साथ कसरत से नमाज़ पढ़ा करती थी |

हज़रत सौदा (रज़ी०) का इंतकाल 54 या 55 हिजरी और बाज़ ने लिखा है के हज़रत उमर (रज़ी०) के आखरी ज़माना ए खिलाफ़त में वफ़ात पाईं |

नबी करीम (स०अ०) ने पहले जो तीन निकाह कीं वो सब हिज़रत से पहले की हैं ,इसके बाद जितने निकाह हुए हैं वह हिजरत के बाद हुईं

 

(4) उम्मुल मोमिनीन हज़रत हफ्सा (रज़ी०) –

हज़रत आईशा (रज़ी०) के बाद हज़रत उमर (रज़ी०) की शहबज़ादी, हज़रत हफ्सा (रज़ी०) से आप (स०अ०) ने निकाह फ़रमाया | नबूवत के पांच साल पहले मक्का में पैदा हुई थीं | हज़रत हफ्सा (रज़ी०) का पहला निकाह मक्का में ही ख़ुनैस बिन हुजैफा (रज़ी०) से हुआ | ख़ुनैस बिन हुजैफा (रज़ी०), बद्र या उहद की लड़ाई में एसा जखम आया  के अच्छे न हुए और इंतकाल फरमा गए  | फिर आप (स०अ०) ने 2 या 3 हिजरी को हफ्सा (रज़ी०) से निकाह फ़रमाया |

हज़रत हफ्सा (रज़ी०) बड़ी आबिदा जाहिदा थीं | रात को अक्सर जागती थीं और कसरत से रोज़ा रखा करतीं थीं | किसी वजह से हुजुर (स०अ०) ने उनको एक तलाक भी दी थी, जिसकी वजह से हज़रत उमर (रज़ी०) को बहुत रंज हुआ | हज़रत जिब्रील (अ०स०) तशरीफ लाए और अर्ज़ किया के अल्लाह जल्ल शानहू का इरशाद है के हफ्सा (रज़ी०) से रुजुह कर लें | ये बड़ी शब् – बेदार और कसरत से रोज़ा रखने वाली हैं | इसलिए रसूल अल्लाह (स०अ०) ने रुजुह कर लिया |

जमादुल ऊला में सन 45 हिजरी में, जबकि उनकी उम्र 63 साल थी तो मदीना में इंतकाल फ़रमाया |

 

(5) उम्मुल मोमिनीन हज़रत ज़ैनब बीनते खुजैमा –

हफ्सा (रज़ी०) के बाद हुजुर (स०अ०) का निकाह हज़रत जैनब (रज़ी०) से हुआ | हज़रत  ज़ैनब (रज़ी०) खुजैमा की बेटी थीं | पहले उनका निकाह अब्दुल्लाह बिन जहश (रज़ी०) से हुआ, जब गजवा ए उहद में शहीद हुए तो हुजुर (स०अ०) ने निकाह किया | हुज़ूर (स०अ०) की बीवियों में हज़रत ख़दीजा (रज़ी०) और हज़रत ज़ैनब (रज़ी०) दो ही बीवियां एसी हैं, जिनका विसाल हुजुर (स०अ०) के सामने हुआ | बाकी 9 हुजुर (स०अ०) के विसाल के वक़्त जिंदा थीं |

हज़रत ज़ैनब (रज़ी०) बड़ी सखी थीं, इसी वजह से इनका नाम इस्लाम से पहले भी उम्मुल मसाकीन यानी मिसकीनों की माँ था | हज़रत ज़ैनब (रज़ी०) 8 महीने हुजुर (स०अ०) के निकाह में रहीं और रबीउल आखिर में सन 4 हिजरी में इंतकाल फ़रमाया |

 

(6) उम्मुल मुमिनीन हज़रत उम्मे सलमा (रज़ी०) –

हज़रत ज़ैनब बीनते खुजैमा (रज़ी०) के बाद हुजुर (स०अ०) का निकाह हज़रत उम्मे सलमा (रज़ी०) से हुआ | हज़रत उम्मे सलमा (रज़ी०) अबू – उमय्या की बेटी थीं | आप (रज़ी०) का पहला निकाह अपने चचाज़ाद भाई अबू – सलमा (रज़ी०) से हुआ, जिनका नाम अब्दुल्लाह बिन अब्दुल असद (रज़ी०) था |

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्दुल असद (रज़ी०) उहद की लड़ाई में एक एक जख्म आ गया था, जिसके वजह से बहुत तकलीफ उठाई | इसके बाद जमादी उल आखिर  महीने में सन 4 हिजरी को इंतकाल किया | हुजुर (स०अ०) ने हज़रत सलमा (रज़ी०) से निकाह की खवाइश ज़ाहिर फरमाई और आखरी शव्वाल सन 4 हिजरी में आप (स०अ०) ने निकाह फ़रमाया |

उम्महातुल मोमिनीन में सबसे आखिर में हज़रत उम्मे सलमा (रज़ी०) का इंतकाल हुआ | इंतकाल के वक़्त सन 59 हिजरी जब हज़रत उम्मे सलमा (रज़ी०) की उम्र 84 साल थी |

 

(7) उम्मुल मुमिनीन ज़ैनब बीनते जहश (रज़ी०) –

हज़रत सलमा (रज़ी०) के बाद हुजुर (स०अ०) का निकाह ज़ैनब बीनते जहश (रज़ी०) से हुआ | हज़रत ज़ैनब बीनते जहश, आप (स०अ०) की फुफी-जात बहन थी | हुजुर (स०अ०) ने उनका पहला निकाह हज़रत ज़ैद बिन हारिसा (रज़ी०) से किया था | ज़ैद (रज़ी०) के तलाक देने के बाद अल्लाह जल्ले शानुहू ने खुद निकाह  हुजुर (स०अ०) से कर दिया, जिसका क़िस्सा सुरह – अहज़ाब में ज़िक्र है |

हज़रत ज़ैनब (रज़ी०) बड़ी सखी थीं और बड़ी मेहनती, जो अपने हाथ से मेहनत करतीं और जो हासिल होता वह सदक़ा कर देतीं | उनके बारे में हुजुर (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया की मुझसे सबसे पहले मरने के बाद वह मिलेगी जिसका हाथ लम्बा होगा | (लम्बा हाथ से मुराद सदक़ा की कसरत थी )

हज़रत ज़ैनब बीनते जहश (रज़ी०) का इंतकाल सन 20 हिजरी में(50 साल की उम्र में) हुआ | हज़रत उमर (रज़ी०) ने नमाज़े जनाज़ा पढाई |

 

(8) उम्मुल मोमिनीन हज़रत ज़ुवेरिया बीनते अल – हारिस (रज़ी०) –

इसके बाद हुजुर (स०अ०) ने हज़रत ज़ुवेरिया बीनते हारिस बिन अबी – जर्रार से हुआ | हज़रत जुवेरिया (रज़ी०) गज्वा मरीसीह में क़ैद होकर आयी थीं और गनीमत में हज़रत साबित बिन कैस (रज़ी०) के हिस्से में आई | क़ैद होने से पहले मुसाफह बिन सफवान के निकाह में थीं | हज़रत साबित (रज़ी०) ने उनको 9 औकिया सोने पर मुकतिब (यानी गुलाम/बांदी) कर दिया |

हज़रत ज़ुवेरिया (रज़ी०) आप (स०अ०) की खिदमत में आईं और अर्ज़ किया – या रसूल अल्लाह ! मैं अपनी कौम के सरदार हारिस की बेटी जुवेरिया हूँ जो मुसीबत मुझपर नाजिल हुई, आपको मालूम है अब इतनी मिकदार मैं मुकतिब हुए हूँ और ये मिकदार मेरे ताक़त से बाहर है | आप (स०अ०) ने फारमाया के मैं तुझे इससे बेहतर रास्ता बताऊँ कि तुझे माल अदा करके आज़ाद कर दूँ और तुझसे निकाह कर लूँ | इस तरह सन 5 हिजरी में इस किस्से के बाद निकाह हो गया |

सही कौम के मुवाफिक सन 50 हिजरी में 65 साल की उम्र में मदीने में आप (रज़ी०) का इंतकाल हुआ और बाज़ ने सन 56 हिजरी में लिखा है

(9) उम्मुल मुमिनीन हज़रत उम्मे हबीबा (रज़ी०) –

उम्मुल मोमिनीन हज़रत उम्मे हबीबा (रज़ी०) अबू –सुफियान (नाम में इख्तलाफ है) की साहबज़ादी थी | उनका पहला निकाह उबैदुल्लाह बिन जहश से मक्का मुकर्रमा में हुआ था | दोनों मियां बीवी मुसलमान हो गए थे, कुफ्फार की तकलीफ़ के बदौलत वतन छोड़ना पढ़ा और हबशा की हिजरत की, वहां जाकर खाविंद नसरानी हो गया, यह इस्लाम पर बाक़ी रहीं |

हुजुर (स०अ०) ने ने हबशा के बादशाह नजाशी के पास पयाम भेजा कि इनका निकाह मुझसे कर दो | जब उम्मे हबीबा (रज़ी०) को मालूम हुआ तो बहुत ख़ुश हुईं | फिर नाज्जाशी ने निकाह करवाया (बाप ने निकाह किया इसमें इख्तलाफ है, ये सही नहीं है इसलिए की उनके बाप उस वक़्त तक मुसलमान नही हुए थे )

हज़रत उम्मे हबीबा (रज़ी०) के इंतकाल में भी इख्तलाफ है, बाज़ के मुताबिक सन 44 हिजरी और बाज़ के मुताबिक सन 42 या 55 हिजरी है |

 

(10) उम्मुल मोमिनीन हज़रत सफ़िया (रज़ी०) –

हज़रत सफ़िया (रज़ी०) हई की बेटी थी, जो हज़रत मूसा (अ०स०) के भाई हारुन (अ०स०) की औलाद में से हैं | पहले सलाम बिन मशकं के निकाह में थीं, उसके बाद कनाना बिन अबी-हक़ीक के निकाह में आयीं |

हज़रत सफ़िया एक सरदार की बेटी थी | दह्या (रज़ी०) जो एक सहाबी थे, हज़रत सफ़िया (रज़ी०) उनकी बांदी थीं, फिर रसूल अल्लाह (स०अ०)  ने उनको खातिरखवाह एवज़ देकर उनको ले लिया और उनको आज़ाद फरमा कर निकाह कर लिया | और सहाबा के साथ शरीक होकर वलीमा फ़रमाया |

रमजान सन 50 हिजरी में सही कौल के मुवाफ़िक़ इंतकाल हुआ, उस वक़्त आप (रज़ी०) की उम्र 60 साल थी |

 

(11) उम्मुल मोमिनीन हज़रत मैमुना (रज़ी०) –

उम्मुल मोमिनीन हज़रत मैमुना (रज़ी०) हारिस बिन हुज्न की बेटी थी, उनका नाम बर्रा था, हुजुर (स०अ०) ने बदल कर मैमुना रख दिया | पहले से अबू-रहम बिन अब्दुल उज्जा के निकाह में थीं |

बाज़ मुवार्रिखीन का यही कौल है कि जब हुजुर (स०अ०) उमरा के लिए मक्का तशरीफ़ ले जा रहे थे, तब मौज़ा सरफ में निकाह हुआ और वापसी में सरफ से ही रुखसती हुई |

आईशा (रज़ी०) फर्मतीं हैं कि मैमुना (रज़ी०) हम सब ज्यादा मुत्तकी और सिला रहमी करने वाली थीं | मुहद्दीसीन और मुवार्रिखीन का इत्तफाक है के हज़रत मैमुना (रज़ी०) वो आखिर खातून थीं जिनका आप (स०अ०) से निकाह हुआ था |

सन 51 हिजरी में सही कौल के मुवाफिक इंतकाल हुआ और बाज़ ने सन 61 में लिखा है | उस वक़्त उनकी उम्र 81 साल थी |

 

दीन की सही मालूमात  कुरआन और हदीस के पढने व सीखने से हासिल होगी |(इंशाअल्लाह)

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