Bad – Zabaan Aurat – बद-ज़बान औरत का नुकसान

بِسمِ اللہِ الرَّحمٰنِ الرَّحِيم

शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है बहुत मेहरबान है

 

बद –ज़बानी –

मशहूर कॉल हैं के जिस रिश्तों को तलवार नहीं काट सकती उसे ज़बान काट देती है | ज़बान की हिफाज़त करनी चाहिए क्यूंकि इज्ज़त और ज़िल्लत की यही ज़िम्मेदार है | बद – ज़बानी का मामला ज्यादातर औरतों के साथ है |

 

इसके मुताल्लिक हदीसें –

हज़रत सहल बिन साद (रज़ी०) से रिवायत है के रसूल अल्लाह (स०अ०) ने फ़रमाया – जो शख्स अपने दोनों जबड़ो और दोनों टांगों के दरमियान वाले आज़ा की ज़िम्मेदारी दे दे (के वह ज़बान और शर्मगाह को ग़लत इस्लामाल नहीं करेगा ) तो मैं उसके लिए जन्नत की ज़िम्मेदारी लेता हूँ | (बुख़ारी)

हज़रत उक़बा बिन आमिर (रज़ी०) फरमाते हैं के मैंने अर्ज़ किया – या रसूल अल्लाह ! नजात हासिल करने का तरीका क्या है ? आप (स०अ०)  ने इरशाद फ़रमाया – अपनी ज़बान को काबू में रखो, अपने घर में रहो ( फ़ज़ूल बहिर न फिरो ) और अपने गुनाहों पर रोया करो | (तिरमिज़ी )

 

बद-ज़बान औरत –

जिसकी बीवी बद-ज़बान हो उसको सारी ज़िन्दगी सुकून हासिल नहीं हो सकता | औरतों को कहा गया है कि वह अपनी ज़बान के अंदर नरमी और मिठास पैदा करे और अच्छे अंदाज़ से बात करे |

ये बात भी काबिले क़ुबूल है के कितनी भी मीठी से मीठी ज़बान वाली औरत क्यों न हो फिर भी उसके अन्दर थोड़ी बहुत कड़वाहत  ज़रूर होती है क्यूंकि औरत जहां इतने रिश्ते संभालती है तो थोड़ी बहुत  कड़वाहत आ ही जाती है, लेकिन औरत की ज़बान में नरमी होनी चाहिए |

ये भी एक सच्चाई है के औरत की ज़बान वह तलवार है जो कभी जंग –आलूद नहीं होती, यानी ज़बान की धार कभी कम नहीं होती |

बाज़ औरतें तो इतनी बद-ज़बान होतीं हैं कि अगर वो औरतें न होतीं तो नाकाबिले बरदाश्त होतीं | कई औरतें अपनी बद-ज़बानी और बद-गुमानी की की वजह से घर बरबाद कर लेती हैं |

 

एक कड़वी सच्चाई –

शरीअत ने कहा कि अपनी शौहर से नर्म अंदाज़ में बात करे और किसी गैर – मर्द से बात करने की नौबत आ जाये तो शाख्ती से बात करे, लेकिन आजकल ये उल्टा फैशन हो गया है के जब औरत अपने शौहर से बात करतीं हैं तो शख्त कड़वाहट लहज़े में और गैर मर्द से करनी हो तो निहायत मीठे लहज़े में के जैसे सारी दुनिया की मिठास इन्ही में समाई हो |

किसी का मशहूर कॉल है के – अगर औरत सारे दिन में एक बार अपने शौहर से नरमी से बात करे, जिस नरमी से वह पड़ोसी मर्द से बात करती है तो उसका घर आबाद रहे | इसी तरह मर्द अगर पुरे दिन में एक बार भी बीवी को उस मुहब्बत की निगाह से देखे जिस नज़र से वह पड़ोसी औरत को देखता है तो हमेशा घर आबाद रहे |

 

पहले की औरतों का दीनदार होने की वजह  –

पहले ज़माने के बुजुर्गों का ये मामुल था के वे अपनी बेटियों को निकाह से पहले सुरह निसा और सुरह नूर का तर्जुमा पढ़ा दिया करते थे क्यूंकि अल्लाह तआला ने सुरह निसा और सुरह नूर में मर्द और औरत के ज़िन्दगी के अहकाम (यानी कैसी ज़िन्दगी गुजारें ) बतलाया है |

यही वजह है के उस ज़माने में औरतें दीनदार थीं | ज़न्दगी कैसे गुज़ारनी है मालूम था इसलिए हमें भी चाहिए अपनी बेटियों की शादी करने से पहले कुरान मजीद का तर्जुमा ज़रूर पढाएं और खास तौर पर निकाह से पहले सुरह निसा और सुरह नूर की तर्जुमा के साथ तालीम दिलवाएं |

दीन की सही मालूमात  कुरआन और हदीस के पढने व सीखने से हासिल होगी |(इंशाअल्लाह)

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