Gajwa e Khadak – खंदक की लड़ाई का क़िस्सा

بِسمِ اللہِ الرَّحمٰنِ الرَّحِيم

शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है बहुत मेहरबान है

 

गजवा ए खंदक –

इस्लामी तारीख की एक एसी लडाई जिसमे कुफ्फार के बड़े लश्कर से बचने के लिए मदीने के चारों तरफ खंदक यानी गड्ढे खोदे गए और कुफ्फार ए मक्का की फौज़  उस खंदक को पार न कर सकी |

 

कुफ्फार के कबीलों का एक साथ होना –

एक तरफ़ जहाँ मक्के के कुफ्फार, मुसलमानों के सख्त दुश्मन थे और हर वक़्त इस फ़िक्र में रहते थे के कैसे मुसलमानों की नुक्सान पहुचाया जाये | इसी कोशिश में वे बहुत से यहूदी क़बाइल और मुशरिकों को मुसलमानों के ख़िलाफ़ जंग के लिए आमादा करते रहते, चुनांचे बहुत से छोटे छोटे काबिले कुफ्फार के साथ हो गए |

तकरीबन दस या चौबीस हज़ार का लश्कर तैयार हुआ जिसमे साढ़े चार हज़ार ऊंट और तीन सौ घोड़े शामिल थे | मदीने के तरफ रवाना हुए और उस फौज़ की कमान अबू सुफियान के हाथों में था |

 

नबी करीम (स०अ०) का मशवरा करना –

जब कुफ्फार के बड़े लश्कर के आने की इत्तला हुजुर (स०अ०) को हुई तो आप ने सहाबा के साथ मशवरा किया | ये राय क़रार पाई के मदीने में रहकर ही लडाई की जाये |

हज़रत सलमान फारसी (रज़ी०) ने मशवरा दिआ के हमले और फौज़ से महफूज़ रहने के लिए चरों तरफ से खंदक खोदी जाये | क्यूंकि अरब के लोग खंदक को पार करने की तरकीब से नावाकिफ़ थे | नबी करीम (स०अ०) ने सलमान फारसी (रज़ी०) की इस तजवीज़ को पसंद किया |

खंदक का काम शुरू हुआ –

मशवरे के बाद खंदक खोदने का काम शुरू किया गया | खंदक पांच गज चौड़ी और पांच गज गहरी खोदी गई | चारों तरफ से इतना  खोदना आसान नहीं था, एक हिस्से को खोदने के लिए दस आदमियों की जमाअत थी |

 

नबी (स०अ०) का बड़े चट्टान को आसानी से तोड़ना  –

खंदक के खोदते में एक जगह सख्त पत्थर आ गया, सबने तोड़ने की कोशिश की और नाकाम हुए तो नबी करीम को इसकी खबर दी गई | आप (स०अ०) दूसरी जगह खंदक खोदने में मशरूफ थे, वहां से आप उसी बड़े चट्टान के पास पहुंचे और कुदाल से आपने  उस चट्टान पर वार किया, चुनांचे उस चट्टान पर सिगाफ पड़ गया और साथ ही रौशनी निकली | नबी करीम (स०अ०) ने अल्लाह हु अकबर कहा और फ़रमाया – मुझको मुल्के शाम की कुंजियाँ दी गईं | आप (स०अ०) ने दूसरी बार उस चट्टान पर वार किया तो वह पूरी तरह फट गया, दूसरी बार भी रोशिनी निकली और आपने फिर से अल्लाह हु अकबर की आवाज़ बुलंद की और फ़रमाया – मुझको मुल्के फ़ारस की कुंजियाँ दी गईं | इसी मौक़े पर नबी करीम (स०अ०) ने कैसर व किसरा के मुसलमानों के हाथों फतह होने की बशारत दी थी |

 

भूख की वजह से पेट पर पत्थर बांधना –

एक सहाबी (रज़ी०) ने भूख की वजह से शिकायत की और कुरता उठाकर देखाया के पेट पर पत्थर बधे थे, ताके फ़ाका की वजह से कमर झुक न पाए | आप (स०अ०) ने अपना कुरता उठाया तो आप के पेट पर दो पत्थर बधे हुए थे |

 

कुफ्फार का खंदक को पार ना करना –

कुफ्फार का लश्कर जब खंदक के सामने आया तो चारों तरफ गड्ढे को देख कर बहुत हैरान रह गए, क्यूंकि इससे पहले अरबों ने इस किस्म की खंदक न देखि थी | हर तरह से खंदक पार करने की कोशिश करते रहे लेकिन नाकाम हुए | तक़रीबन एक माह तक कुफ्फार वही रहकर खंदक पार होने की कोशिश करने रहे लेकिन कभी कामयाबी नहीं मिली | सहाबा (रज़ी०) भी वही बहादुरी से डटें रहे और कुफ्फार का मुकाबला करते रहे |

 

आखिर में –

जंग के 27वे  दिन एक ज़ोर की हवा चली और कुफ्फार के ख़ेमों को उड़ाने लगे, शमा बुझेने लगी, गोया तमाम लश्कर इस आंधी से कॉफ़ में आ गए और वापस भाग खड़े हुए |

नबी करीम (स०अ०)  को जब ये खबर मिली के कुफ्फार भाग गए और मैदान खली हो चूका है तो आप (स०अ०) मदीना वापस हुए |

दीन की सही मालूमात  कुरआन और हदीस के पढने व सीखने से हासिल होगी |(इंशाअल्लाह)

 

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