Miya Biwi ke Huqooq in islam – मियाँ बीवी के हुकूक

بِسمِ اللہِ الرَّحمٰنِ الرَّحِيم

शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है बहुत मेहरबान है

 

मियाँ बीवी का रिश्ता  –

शौहर और बीवी का रिश्ता बहुत नाज़ुक होता है | अगर भाई – भाई में दुश्मनी है और मरते दम तक आपस में बात न करें तब भी भाई ही रहेंगे लेकिन मियाँ और बीवी का रिश्ता एक वाहिद रिश्ता है जो टूट जाये तो हमेशा के लिए एक दुसरे के लिए हराम हो जाते हैं यानी बिलकुल अजनबी हो जाते हैं | यही वजह है के अल्लाह तआला को जाएज़ अमल  जो नापसंदीदा है वो है मियाँ बीवी का अलग होना |

 

अल्लाह तआला का इरशाद –

هُنَّ لِبَاسٌ لَكُمْ وَأَنْتُمْ لِبَاسٌ لَهُنَّ

वो (बीवियां) तुम्हारे लिए लिबास हैं और तुम उनके लिए लिबास हो (सुरह बकरह)

 

इसके मुताल्लिक हदीस –

नबी करीम (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया – अगर शिरियत में किसी और को सजदा करने की इज़ाज़त होती तो मैं औरत को हुक्म देता की वह अपने शौहर को सजदा करे (तिरमिज़ी)

हज़रत आयशा (रज़ी०) की रिवायत है कि नबी करीम (स०अ०) जब भी घर में दाख़िल होते तो मुस्कुराते चेहरे के साथ दाखिल होते थे |

 

बेहतरीन शौहर की निशानी (हुकूक) –

(1) निकाह के बाद बीवी की पूरी ज़िम्मेदारी शौहर पर होती है के उसके कमी –बेशी (खर्चे ) का पूरा करे क्यूंकि अल्लाह तआला ने औरत पर कमाने का बोझ नहीं डाला है |

(2) एक अच्छा शौहर वो है जो अपनी बीवी से हमेशा नरमी से बात करे | अगर काम का टेंशन हो तो उसे बाहर ही छोड़ कर आये और मुस्कुराकर बीवी से मिले |

आजकल के शौहर का ये हाल है के बाहर इतनी नरमी होती हैं की बातों में जैसे शहद टपकता हो और जैसे ही घर में दाखिल होते हैं के जल्लाद बन जाते है के बीवी से बेरुखी और शख्ती से पेश आते हैं, आल्लाह तआला को शख्त मिजाज़ लोग पसंद नहीं इससे बचने की कोशिश करनी चाहिए |

(3) बेहतरीन शौहर वो है जो अपनी बीवी के कामों में हाथ बटाये | हमारे प्यारे नबी (स०अ०) अपनी बीवियों के काम में हाथ बटाया करते थे |

(4) बीवी की छोटी से छोटी चीजों का ख्याल रखे | बेहतर ये है के हर महीने अपने हसियत के मुताबिक़ पैसा दे दे ताके बीवी अपनी ज़रूरत पूरी कर सके, बाज़ बीवियों को एसी ज़रूरत होती है के वो शौहर हो नहीं कहती लिहाज़ा हर महीने पैसा देने से वो अपने हसाब से खर्च कर सकती हैं |

(5) शौहर को चाहिए के वो अपनी बीवी को बराबर तरजीह दे यानी बाज़ घरों में अगर माँ –बाप, भाई बहन हैं तो बीवी को तरजीह नहीं देते हैं |  माँ-बाप और भाई बहन की तरह बीवी को भी वैसे ही तरजीह देना ज़रूरी है |

(6) बीवी का लिबास शौहर है इसलिए शौहर हर तरह से बीवी की हिफाज़त करे | उसकी इज्ज़त व अबरू की और उसके परदे का ख़ास ख्याल करे |

(7) अगर बीवी से कोई गलती हो जाये तो शौहर को चाहिए के उसे माफ़ कर दे |

(8) शौहर को गुस्से आये तो चाहिए के बर्दाश्त करे, बाज़ दफह  गुस्से में शौहर एसे अलफ़ाज़ बोल जाते हैं के निकाह टूटने का ख़तरा हो जाता है |

(9) शौहर को ये हक़ नहीं के वह बीवी पर हाथ उठाए, बाज़ लोग अपनी मर्दानगी सिर्फ अपनी बीवियों पर ही दिखाते हैं और बाहर में भीगी बिल्ली बन जाते हैं, लिहाज़ा इससे बचना ज़रूरी है |

(10) अच्छा शौहर वह है जो अपनी खवाइश बीवी के अलावा और किसी गैर महरम औरत से पूरी ना करे यानी खयानत न करे |

 

बेहतरीन बीवी की निशानी (हुकूक) –

(1) रिवायतों में है के अच्छी बीवी मिल जाना, अल्लाह तआला की बहुत बड़ी नेमतों में से एक है | नेक बीवी की ये सिफ़त है के वो अपने शौहर से नरमी का बर्ताव करती है |

(2) बीवी को चाहे कितनी भी परेशानी हो, उसे चाहिए के जब भी उसका शौहर बाहर से काम करके आये तो उससे मुस्कुराकर इस्तकबाल करे |

(3) हदीस से मालूम होता है के अगर किसी औरत का शौहर उससे नाराज़ है तो गोया अल्लाह तआला भी नाराज़ हो जाते हैं और अगर रात को शौहर नाराज़ ही सो गया तो पूरी रात बीवी को गुनाह होता रहेगा |

(4) बीवी को चाहिए के वो सिर्फ अपने शौहर के लिए ही सजे- सवरे और अपने शौहर से खयानत न करे और घर में रहकर उसके बच्चों की अच्छी परवरिश करे, एसा करते हुए अगर उसकी मौत आ गई तो इंशाअल्लाह वो जन्नत में दाखिल होगी |

(5) बीवी को चाहिए के हर हाल में शौहर की खिदमत करे | उसके आराम का खास ख्याल रखे |

(6) बीवी को ये हक़ नहीं के अपने शौहर का पैसा फुजूल खर्च करे और हैसियत से ज्यादा खवाइश करे मसलन बाज़ कहतीं हैं के फलां के पास जो चीज़ है मुझे भी चाहिए वगैरह

(7) बीवियों को मना किया गया है के वह अपने शौहर से बद-ज़बानी करे, आजकल ये आम है के जो मन में आया वो शौहर को बोल दिया और बाज़ दफह एसे शख्त अलफ़ाज़ बोल देतीं हैं बर्दाश्स्त से बाहर हो जाता है |

(8) मुसीबत में हो या सुकून में हर हाल में बीवी को चाहिए के शौहर का साथ दे |

(9) अपने शौहर के खानदान वालों यानी सास ससुर वगैरह से नरमी का मामला करे और हक़ बात करे और रिश्तों को सच्चे दिल से निभाए |

(10) जिस बात से शौहर को तकलीफ़ हो या शौहर मना करे उससे फ़ौरन अलग हो जाये मसलन शौहर ये बोले के फलां से बात न करो या फलां काम मत करो तो फ़ौरन फरमाबरदारी करे |

 

एक नसीहत –
 ” खुबसूरत अमल इंसान की शख्सियत बदल देता है और खुबसूरत अखलाक इंसान की ज़िन्दगी “

 

दीन की सही मालूमात  कुरआन और हदीस के पढने व सीखने से हासिल होगी |(इंशाअल्लाह)

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दुआ की गुज़ारिश

 

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