Islamic Months and Importance - इस्लामी महीने और फ़ज़ीलत

بِسمِ اللہِ الرَّحمٰنِ الرَّحِيم

शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है बहुत मेहरबान है

 

 

इस्लामी हिजरी (कमरी महीने) –

इस्लामिक महीनों के नाम हर मुसलमान को जानना और याद करना ज़रूरी है | इस्लामी महीनों की शुरुवात नबी करीम (स०अ०) के मक्का से मदीना हिजरत करने के बाद हुई, हिजरी महीने  की शुरुवात के वक़्त हज़रत उमर (रज़ी०) ख़लीफा थे | हज़रत अली (रज़ी०) ने मशवरा दिया की अरबी महीने का आगाज़ आप (स०अ०) के हिजरत से शुरू हो, जो के हज़रत उमर (रज़ी०) ने राय को क़ुबूल फरमाई |

 

इस्लामी महीनों के नाम और फ़ज़ीलत –
मुहर्रम

इस्लामी महीने की शुरुवात मुहर्रम से होती है | अल्लाह तआला ने जो 4 महीने हुरमत के रखे हैं उनमे से एक मुहर्रम भी है | माहे मुहर्रम की फ़ज़ीलत और खुसुसियात क़दीम ज़माने से चली आ रही है | मुहर्रम के महीने में बिद्दत और खुराफ़ात से हम सबको बचना चाहिए |

 

मुहर्रम महीने में होने वाले वाक़यात –

(1) मुहर्रम के महीने में कर्बला का वाकया पेश आया के हज़रत हुसैन (रज़ी०) को शहीद कर दिया गया |

(2) इसी महीने में अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा (अ०स०) और बनी इसराईल को फिरओन से निज़ात अता फरमाई |

(3) मुहर्रम के महीने में हज़रत उमर फारूख (रज़ी०) को शहीद कर दिया गया |

 

मुहर्रम में किया जाने वाला अमल –

रमज़ान के रोज़े के बाद सबसे अफज़ल नफिल रोज़े मुहर्रम के हैं | नबी करीम (स०अ०) ने मुहर्रम के 9-10 या 10-11 तारिख के रोज़े रखने का हुक्म दिया है के इस दिन के रोज़े रखने से 1 साल के गुनाह माफ़ होते हैं  |

 

सफ़र –

सफ़र इस्लामी महीने का दूसरा महीना है | अरब के लोग सफ़र के महीने को मनहूस समझते थे क्योंके इस महीने में लूट-पाट और क़त्ल व गारत ज्यादा हुआ करती थी  | शरियत  में कोई महीना मनहूस नहीं है |

सफ़र महीने में होने वाले वाकयात –

(1) हज़रत हसन (रज़ी०) की शहादत इसी महीने में हुई |

(2) नबी करीम (स०अ०) मक्का से मदीना हिजरत फरमाई |

(3) हज़रत हुसैन (रज़ी०) की शाहेबजादी की वफात हुई |

 

रबी उल अव्वल –

इस्लाम का तीसरा महीना रब्बी उल अव्वल है | नबी करीम (स०अ०) इसी महीने में दुनिया में तशरीफ़ लाये | रिवायत में है के आप (स०अ०) 12 रबी उल अव्वल पीर के दिन पैदा हुए | बाज़ के नजदीक हज़रत हसन (रज़ी०) की शहादत इसी महीने में हुई |

 

रबी उल सानी –

चौथा महीने रबी उल सानी है | रबी उल सानी को रबी उल आखिर भी कहते हैं | इसी महीने में हज़रत अबू बकर सिद्दीक (रज़ी०) की पैदाईश हुई और नबी करीम (स०अ०) की चाहिती बेटी हज़रत फातिमा (रज़ी०) की वफात हुई |

 

जमादी उल अव्वल –

पांचवा महीना इस्लमी हिजरी का जमादी उल अव्वल है | हज़रत जैनब बीनते अली (रज़ी०) की पैदाइश इसी महीने में हुई |

 

जमादी उल सानी –

छठा महीना जिसे जमादी उल आखिरभी कहते हैं |

इस महीने में हज़रत अबू बकर सिद्दीक (रज़ी०) के वफात हुई |

हज़रत फातिमा (रज़ी०) की पैदाइश हुई | हारुन रशीद (र०) की वफात इसी महीने में हुई |

 

रजब –

सातवा महीना रजब है | अल्लाह तआला ने रजब महीने को हूरमत का महीना क़रार दिया है | हुरुमत के महीने में जंग करने से मना फ़रमाया गया था | ज्यादा इबादत करने और गुनाह से बचने की ताकीद की गई है |

 

इस महीने के वाक्यात –

(1) जंग ए तबूक पेश आया

(2) हज़रत खवाजा मोईनुद्दीन चिस्ती (र०) की पैदाइश हुई |

शाबान

आठवा महीना शाबान है | नबी पाक (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया रमजान अल्लाह का महीना है और शाबान मेरा महीना है, लिहाज़ा आप (स०अ०) इस महीने में ज्यादा इबादात किया करते थे और रमजान उल मुबारक की तय्यारी इसी महीने से शुरू फरमाते |

 

इस महीने के वाक्यात –

(1) हज़रत हुसैन (रज़ी०) की पैदाइश हुई |

(2) शाबान के महीने में अल्लाह तआला फरिश्तों को पुरे साल की पेश आने वाले मामलात (मसलन मौत, रिज्क वगैरह ) फरिश्तों के हवाले करते हैं |

 

रमजान उल मुबारक –

नौवा महीना रमजान उल मुबारक है | रमज़ान की फ़ज़ीलत और बरकात का ज़िक्र कसरत से कुरआन व हदीस में है | पुरे महीनो का सरदार रमजान है | इस महीने में हर नेक अमल का सवाब 70 गुना बड़ा दिया जाता है |

 

इस महीने के वाक्यात –

(1) इस महीने में कुरआन मजीद नाजिल हुआ |

(2) शैतान क़ैद कर दिया जाता है |

(3) हज़रत ख़दीजा (रज़ी०) की वफात इसी महीने में हुई |

(4) हज़रत अब्दुल कादिर जिलानी (र०) की पैदाइश हुई |

 

रमज़ान के अमल –

(1) कसरत से कुरआन मजीद की तिलावत और नवाफिल अदा करनी चाहिए |

(2) ज्यादा से ज्यादा नेक अमल करनी चाहिए और बुराई से बचना ज़रूरी है |

(3) तरावीह का इह्तेमाम और ताक़ रातों में जाग कर इबादात करना |(जो हज़ार महीनों से अफज़ल है )

(4) ज़कात और सदक़ात की कसरत |

(5) अपने लिए और अपने मरहूमीन  के लिए मगिरत की दुआ करना |

 

शव्वाल

दसवा महीना शव्वाल है | 01 शव्वाल को ईद का दिन होता है | इसी दिन मुसलमानों को काफिरों पर फतह हासिल हुए थी और  एक शव्वाल को ख़ुशी ईद का दिन क़रार दिया गया गोया इस दिन रोज़ा रखना हराम है | ईद के बाद नफिल रोज़े रखना अफज़ल है |

 

जिल क़द –

ग्यारहवा महीना जिल कदा है | जिल क़द 4 हुरुमत के महीने में शामिल है और इस महीने में इबादात करना और गुनाह से बचना ज़रूरी है |

 

वाक्यात

(1) इसी महीने में हज़रत इब्राहीम (अ०स०) और हज़रत इस्माईल (अ०स०) खाना ए काबा की तामीर की थी |

(2) इस महीने में हज़रत अली (रज़ी०) की पैदाइश हुई |

 

जिल हिज्जा –

आखरी महीने बारहवा जिल हिज्जा है | जिल क़द के बाद जिल हिज्जा भी हुरुमत महीने में से है | इस महीने की भी अहम् फ़ज़ीलत और बरकात हैं |

 

वाक्यात

(1) हज़रत इब्राहीम (अ०स०) ने अल्लाह तआला के हुक्म पर अपने चाहिते बेटे (हज़रत इस्माईल (अ०स०) की क़ुरबानी का अमल पेश किया |

(2) इसी महीने में हज के अरकान अदा हुए |

(3) ईद उल अजहा का दिन

 

जिल हिज्जा का अमल –

(1) ईद उल अजहा की नमाज़ पढना |

(2) हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद तकबीर कहना

(3) ईद उल अजहा के तीन दिन क़ुरबानी करना

(4) ईद उल अजहा के दिन रोज़े हराम है |

(5) हाजी हज के अरकान अदा करना |

 

दीन की सही मालूमात  कुरआन और हदीस के पढने व सीखने से हासिल होगी |(इंशाअल्लाह)

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